खरोरा,
भारत देव भूमि है। यहां किसी भी मानव का जन्म अपना कल्याण कर लेने यानी जन्म-मृत्यु के चक्कर से छुटकारा पाने के लिए होता है। लेकिन माया के वश में आकर हम सब अपना मूल कार्य को भूल कर संसारिक भोग-विलास में फंस जाते हैं। जिसके कारण परेशानी बढ़ जाती है। उक्त बातें ग्राम जंजगीरा में महिला मंडल द्वारा आयोजित हो रहे संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दौरान कथावाचक पंडित परमानंद शास्त्री मढ़ी वालें ने कही।
कथा के चौंथे दिन कथा प्रसंग में कथा व्यास ने व्यास पीठ से भक्त प्रहलाद चरित्र और भगवान नृसिंह की कथा विस्तार से बताया तो भक्त भावविभोर हो उठे। भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति और अपने परम भक्त के लिए भगवान के प्रेम को बहुत ही सुंदर शब्दों में श्रोताओं के समक्ष भागवताचार्य ने सुनाई कि जब आप भगवान की भक्ति और प्रेम में पूर्ण समर्पण भाव से जुड़ जाते हैं तो भगवान स्वयं आपके पास आते है हर संकट से आपकी रक्षा करने के लिए, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर धरती पर अपने परम भक्त प्रहलाद को उसके दैत्य पिता से बचाने के लिए आए और उसका संहार किया। इसलिए अगर भक्ति करनी है तो पूरे तन मन धन को भगवान के श्रीचरणों में समर्पित करके भक्ति करनी चाहिए तभी वह सार्थक होता है। अपनी भक्ति और अपने भगवान पर कभी संदेह नहीं करना चाहिए जिस प्रकार भक्त प्रहलाद ने अपने भगवान को कभी नहीं देखा था फिर भी अपने हृदय में भगवान के लिए विश्वास बनाए रखा ठीक उसी प्रकार का विश्वास बनाए रखना चाहिए। कथा के बीच-बीच में प्रस्तुत एक से बढ़कर एक भजनों को सुन श्रद्धालु झूम उठे।
तीसरें दिन शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया गया। इस दौरान शिव-पार्वती विवाह की आकर्षक झांकी भी सजाई गई थी जिसे देख श्रद्वालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा के परायणकर्ता पंडित कृष्णा महाराज मढ़ी वालें ने बताया कि 12 अप्रैल से 20 अप्रैल तक आयोजित हो रहे भागवत कथा का रसपान करने गांव सहित आसपास गांव से भी बड़ी संख्या में रसिक श्रोतागण पहुंच रहे है। कथा का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रहता है।