छत्तीसगढ़ के सुशासन तिहार शिविरों में बीजेपी विधायकों की प्रशासन के प्रति नाराजगी खुलकर सामने आई है. वहीं विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते और उद्धेश्वरी पैकरा ने अधिकारियों पर जनता की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं करने के आरोप लगाए।
बलरामपुर,
छत्तीसगढ़ में इन दिनों सुशासन तिहार मनाया जा रहा है. सूबे के मुखिया खुद जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं और उनका तुरंत समाधान का दावा भी किया जा रहा है. इसी कड़ी में बलरामपुर जिले में आयोजित सुशासन तिहार शिविरों में क्षेत्रीय विधायकों की नाराजगी भी सामने आ रही है. यह नाराजगी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
पहले मामले की बात करें तो वाड्रफनगर विकासखंड के गुडरू गांव में सुशासन तिहार का शिविर लगाया गया था, जहां प्रतापपुर विधानसभा से विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते पहुंचीं. उन्होंने शिविर के बीच अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी को अपने पद और कुर्सी का घमंड नहीं होना चाहिए. उन्हें जनता का काम करने के लिए रखा गया है और जब जनता का काम समय पर नहीं होता, तब लोग आहत होकर लौटते हैं. इसके साथ ही उन्होंने सरकार की योजनाओं का जमीनी स्तर पर सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं होने को लेकर भी प्रशासन पर सवाल उठाए।
वन विभाग पर गंभीर आरोप-
वहीं दूसरी ओर कुशमी विकासखंड के चांदो गांव में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में सामरी विधानसभा की विधायक उद्धेश्वरी पैकरा भी पहुंचीं. उन्होंने जनता द्वारा की गई शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होने पर नाराजगी जताई. शिविर के दौरान ही उन्होंने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग जंगल बचाने के बजाय जंगल उजाड़ने का काम कर रहा है।
कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल-
विधायक यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने एक-एक कर कई विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि शिविर का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन ऐसा कहीं दिखाई नहीं दे रहा. अब सवाल यह उठता है कि अपनी ही सरकार में विधायकों को प्रशासन के कामकाज को लेकर इतनी नाराजगी क्यों है? क्या वाकई बीजेपी सरकार में अफसरशाही हावी होती जा रही है।