इस बार मध्य प्रदेश के चार और छत्तीसगढ़ के तीन व्यक्तियों को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. इन सभी ने साहित्य, सामाजिक सेवा, पुरातत्व और पारंपरिक युद्धकला के क्षेत्र में खास योगदान दिया है।
एमपी से इन्हें मिलेगा पद्मश्री पुरस्कार-
भोपाल निवासी कैलाश चंद्र पंत को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 'पद्म श्री' से सम्मानित किया जाएगा. अपनी युवावस्था में सुधारवादी विचारधाराओं से प्रेरित होकर, उन्होंने पत्रकारिता को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।
'बैतूल के जल पुरुष' (Water Man of Betul) के नाम से मशहूर मोहन नागर को समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके कार्यों के लिए 'पद्म श्री' से नवाजा जाएगा. वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और 'गंगा अवतरण अभियान' जैसी पहलों के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी समुदायों को जल संरक्षण के प्रयासों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. नारायण व्यास को पुरातत्व के क्षेत्र में चार दशकों तक दिए गए उनके योगदान के लिए 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया. उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण स्थलों की खुदाई और संरक्षण का कार्य किया और साथ ही विद्यार्थियों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया।
सागर स्थित ऐतिहासिक 'छत्रसाल बुंदेला अखाड़े' में भगवानदास रायकवार ने बुंदेली युद्ध कला की उस परंपरा को पुनर्जीवित किया, जो उस समय विलुप्त होने की कगार पर थी. उन्होंने न केवल स्वयं इस कला का अभ्यास जारी रखा, बल्कि युवाओं को प्रशिक्षण देकर इसे जीवित भी बनाए रखा।
छत्तीसगढ़ से इन्हें मिलेगा पद्मश्री पुरस्कार-
* छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के तीन समाजसेवियों को भी दिल्ली में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
* दतेवाड़ा जिले के बारसूर स्थित वनवासी कल्याण आश्रम में रहकर पिछले 35 वर्षों से जनजातीय लोगों बीच स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने वाले गोड़बोले दंपति को आज दिल्ली में पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
* गोड़बोले दंपत्ति के अलावा दंतेवाड़ा जिले के ही हीरानार की बुधरी ताती को भी आज पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
* बुधरी ताती को महिला उत्थान और समाज सेवा के के लिए यह सम्मान दिया जाएगा. ताती लगभग 1984 से बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में नशामुक्ति , साक्षरता और आदिवासियों में जागरूकता का काम कर रही है।