"ज्ञान भारतम् मिशन" के तहत प्राचीन विरासत सहेजने की पहल, रायपुर में बांटे गए प्रमाणपत्र।
खरोरा,
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल युग से जोड़ने की दिशा में रायपुर जिला प्रशासन की अनूठी पहल 'ज्ञान भारतम् मिशन' रंग ला रही है। इसी कड़ी में खरोरा क्षेत्र से मिली दुर्लभ पांडुलिपि के सर्वेक्षण में विशेष योगदान देने वाले किशोर कुमार नशीने और पांडुलिपि को पीढ़ियों से संरक्षित कर रखने वाले पं. संतोष राव को कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने सम्मानित किया।
राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रशासन ने विभिन्न सर्वेक्षकों और संरक्षकों को प्रशंसा पत्र प्रदान किए। खरोरा में मिली प्राचीन पांडुलिपि इस अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
खरोरा बना मिशन का केंद्र-
जिला प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का चिन्हांकन, सर्वेक्षण और डिजिटल मैपिंग करना है। खरोरा से मिली पांडुलिपि के बाद क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता और बढ़ गई है।
दो श्रेणियों में सम्मान-
1. सर्वेक्षक- किशोर कुमार नशीने को खरोरा सहित दुर्गम क्षेत्रों में जाकर पांडुलिपियों का चिन्हांकन और मैपिंग कार्य में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रशंसा पत्र दिया गया।
2. संरक्षक- पंडित सतोष राव जी को पूर्वजों की प्राचीन पांडुलिपि को सुरक्षित रखने और सर्वेक्षण में प्रशासन को सहयोग देने के लिए सम्मानित किया गया।
प्रशासनिक नेतृत्व-
प्रमाणपत्रों पर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा और CEO जिला पंचायत कुमार विश्वरंजन के हस्ताक्षर हैं। कलेक्टर ने कहा, "किशोर नशीने और संतोष राव जैसे जागरूक नागरिकों का सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के अमूल्य भंडार को संरक्षित रखने में अत्यंत सराहनीय है।"
ज्ञान भारतम् मिशन' के तहत डिजिटल मैपिंग के बाद इन ग्रंथों को शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए सुलभ बनाया जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ की प्राचीन विद्या और इतिहास पर नई रोशनी पड़ेगी। रायपुर जल्द ही पांडुलिपि संरक्षण के क्षेत्र में मॉडल जिले के रूप में उभर सकता है।