3AC कोच में चूहों ने किया ऐसा कांड, कोर्ट तक पहुंच गया मामला, रेलवे पर ठोका 15000 का जुर्माना

Hemant Dewangan 2026-05-30

कटनी उपभोक्ता आयोग ने 3AC कोच में चूहों द्वारा यात्री का बैग और कपड़े कुतरे जाने को रेलवे की सेवा में गंभीर कमी माना. आयोग ने रेलवे को जिम्मेदार ठहराते हुए पीड़ित यात्री विपिन दुबे को 15 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।

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मध्यप्रदेश,
         कटनी उपभोक्ता आयोग ने 3AC कोच में चूहों द्वारा यात्री का बैग और कपड़े कुतरे जाने को रेलवे की सेवा में गंभीर कमी माना. आयोग ने रेलवे को जिम्मेदार ठहराते हुए पीड़ित यात्री विपिन दुबे को 15 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया. उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन आयोग ने 22 मई 2026 को फैसला सुनाते हुए रेलवे को निर्देश दिया कि वह पीड़ित यात्री को मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये, वाद व्यय (कानूनी खर्च) के लिए 5,000 रुपये और क्षतिग्रस्त सामान व कपड़ों के मुआवजे के रूप में 5,000 रुपये, यानी कुल 15,000 रुपये का भुगतान करे. इस चर्चित मामले में विपिन दुबे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मौसुफ बिट्टू और अधिवक्ता प्रमोद तिवारी ने प्रभावी पैरवी की. उन्होंने उपभोक्ता अदालत में यह साबित किया कि प्रीमियम श्रेणी (3 AC) में अधिक किराया लेने के बावजूद यात्री को गंदगी और अव्यवस्था का सामना करना पड़ा, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है. फैसले के बाद यह मामला कानूनी हलकों के साथ-साथ रेल यात्रियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है. जानकारों का मानना है कि यह फैसला रेलवे को अपनी सफाई और रखरखाव व्यवस्था बेहतर करने के लिए मजबूर करेगा.उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन
        आयोग ने 22 मई 2026 को फैसला सुनाते हुए रेलवे को निर्देश दिया कि वह पीड़ित यात्री को मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये, वाद व्यय (कानूनी खर्च) के लिए 5,000 रुपये और क्षतिग्रस्त सामान व कपड़ों के मुआवजे के रूप में 5,000 रुपये, यानी कुल 15,000 रुपये का भुगतान करे. इस चर्चित मामले में विपिन दुबे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मौसुफ बिट्टू और अधिवक्ता प्रमोद तिवारी ने प्रभावी पैरवी की. उन्होंने उपभोक्ता अदालत में यह साबित किया कि प्रीमियम श्रेणी (3 AC) में अधिक किराया लेने के बावजूद यात्री को गंदगी और अव्यवस्था का सामना करना पड़ा, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है. फैसले के बाद यह मामला कानूनी हलकों के साथ-साथ रेल यात्रियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है. जानकारों का मानना है कि यह फैसला रेलवे को अपनी सफाई और रखरखाव व्यवस्था बेहतर करने के लिए मजबूरजिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, कटनी ने उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. आयोग ने ट्रेन यात्रा के दौरान चूहों द्वारा एक यात्री के बैग और कपड़ों को कुतरे जाने की घटना को सेवा में गंभीर लापरवाही माना है. आयोग ने रेलवे प्रशासन को इस मामले में सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए पीड़ित यात्री को कुल 15 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
          कटनी की आदर्श कॉलोनी निवासी विपिन दुबे ने 17 फरवरी 2020 को कटनी से कल्याण (मुंबई) तक की यात्रा के लिए वातानुकूलित तृतीय श्रेणी (3 AC) में रिजर्वेशन कराया था. प्रीमियम श्रेणी का टिकट होने के कारण उन्हें सुरक्षित और आरामदायक यात्रा की उम्मीद थी. सफर के दौरान उन्होंने अपना सामान सीट के नीचे सुरक्षित जगह पर रखा था. कुछ देर बाद जब उन्होंने नीचे देखा तो हैरान रह गए. चूहों ने उनके बैग को बुरी तरह कुतर दिया था, जिससे बैग में रखे कपड़े और अन्य जरूरी सामान पूरी तरह खराब हो गए थे. यात्रा के दौरान ही विपिन दुबे ने रेलवे अधिकारियों और टीटीई को इसकी लिखित शिकायत भी दी थी।
रेलवे ने नहीं की कोई कार्रवाई-
        उन्हें उम्मीद थी कि रेलवे इस मामले में तुरंत कार्रवाई करेगा, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाया गया. रेलवे के इस रवैये से परेशान होकर उन्होंने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई. मामले की सुनवाई के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग, कटनी ने रेलवे की सभी दलीलों और तकनीकी तर्कों को खारिज कर दिया. आयोग ने अपने आदेश में कहा, रेलवे यात्रियों से किराया और प्रीमियम शुल्क लेने के बाद उन्हें सुरक्षित, साफ-सुथरी और सम्मानजनक यात्रा सुविधा देने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता. एसी या वीआईपी श्रेणी में चूहों की मौजूदगी और सामान का नुकसान होना साफ तौर पर सेवा में कमी को दर्शाता है. इसके कारण यात्री को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी, जिसकी भरपाई रेलवे को करनी होगी।
उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन-
         आयोग ने 22 मई 2026 को फैसला सुनाते हुए रेलवे को निर्देश दिया कि वह पीड़ित यात्री को मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये, वाद व्यय (कानूनी खर्च) के लिए 5,000 रुपये और क्षतिग्रस्त सामान व कपड़ों के मुआवजे के रूप में 5,000 रुपये, यानी कुल 15,000 रुपये का भुगतान करे. इस चर्चित मामले में विपिन दुबे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मौसुफ बिट्टू और अधिवक्ता प्रमोद तिवारी ने प्रभावी पैरवी की. उन्होंने उपभोक्ता अदालत में यह साबित किया कि प्रीमियम श्रेणी (3 AC) में अधिक किराया लेने के बावजूद यात्री को गंदगी और अव्यवस्था का सामना करना पड़ा, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है. फैसले के बाद यह मामला कानूनी हलकों के साथ-साथ रेल यात्रियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है. जानकारों का मानना है कि यह फैसला रेलवे को अपनी सफाई और रखरखाव व्यवस्था बेहतर करने के लिए मजबूर करेगा।

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