बैतूल जिले में मूंग उगाने वाले किसानों की चिंता लगातार बढ़ती ही जा रही है. वहीं किसानों का कहना है कि खेतों में फसल कटी हुई रखी है, गिरदावरी के चलते पंजीयन नहीं हो पा रहा है. वहीं पटवारी भी तमाम तरह की बातें कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश,
बैतूल जिले में रवि सीजन की मूंग फसल किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है. गिरदावरी नहीं चढ़ने के कारण किसान ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन नहीं करवा पा रहे हैं, जिससे उन्हें समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने में दिक्कत आ रही है. जिले में 15 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में मूंग की खेती की गई है. सरकार ने 25 मई से मूंग खरीदी के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन राजस्व विभाग की तरफ से 90 प्रतिशत किसानों की फसल अभी तक ई-उपार्जन पोर्टल पर अपडेट नहीं की गई है।
नियमों के मुताबिक, जब तक पटवारी द्वारा खसरे में फसल की ऑनलाइन गिरदावरी दर्ज नहीं होती है, तब तक एमएसपी पर पंजीयन संभव नहीं है. बता दें कि किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि मूंग की फसल पूरी तरह पककर तैयार है और कई जगह कटाई भी शुरू हो चुकी है. इसी बीच जिले में बारिश का दौर शुरू हो गया है, जिससे खेतों में रखी फसल खराब होने की कगार पर पहुंच गई है।
पंजीयन नहीं हो पा रहा- किसान
वहीं किसानों का कहना है कि हमारी मूंग तैयार है. खेत में काट कर रखी है, लेकिन गिरदावरी नहीं होने से पंजीयन नहीं हो रहा. पटवारी का कहना है कि आईडी ब्लॉक है. बारिश शुरू हो गई है, फसल खराब हो रही है. अगर फसल हटा ली, तो बाद में मान्य नहीं होगी. किसानों ने कहा कि पंजीयन की अंतिम तिथि 15 जून है, लेकिन गिरदावरी नहीं होने से वे समय पर पंजीयन नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में वे लगातार पटवारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
ग्राम पंचायतों में सर्वेयर नियुक्त-
बैतूल एसडीएम की माने तो जिन ग्राम पंचायतों में सर्वेयर नियुक्त हैं. वहां गिरदावरी दर्ज की जा रही है. अन्य जगहों पर पटवारियों के माध्यम से काम किया जा रहा है. जल्द ही सभी किसानों की गिरदावरी दर्ज कर दी जाएगी. अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते गिरदावरी पूरी कर पाएगा या फिर बारिश के चलते किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा और किसान एमएसपी पर मूंग बेचने परेशान होते नजर आएंगे।