तिल्दा की बेटी चारु बनी मेहनत की मिसाल, 23 साल की उम्र में 19 सरकारी परीक्षाएं पास कर रचा इतिहास

Admin 2026-06-06

स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी गोल्ड मेडल से सम्मानित, CAG चेन्नई में AAO के पद पर कार्यरत*

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रिपोर्ट संजय सेन 

छत्तीसगढ़ के तिल्दा-नेवरा की चारु पांडेय ने अपनी लगन और अटूट हौसले से ऐसी उपलब्धि हासिल की है जो प्रदेश की हर बेटी के लिए प्रेरणा बन गई है। महज 23 वर्ष की उम्र में चारु ने केंद्र और राज्य सरकार की 19 प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। इस असाधारण कामयाबी के लिए आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान चारु के परिवार के साथ-साथ पूरे तिल्दा और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का पल लेकर आया है।

चारु प्रवीण कुमार पांडेय और सुधा पांडेय की पुत्री हैं। उनके पिता प्रवीण पांडेय तिल्दा में शासकीय शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं जबकि माता सुधा पांडेय घर संभालती हैं। प्रारंभिक शिक्षा चारु ने तिल्दा के ही एक निजी स्कूल से प्राप्त की। बचपन से ही पढ़ाई में तेज और अनुशासित रहने वाली चारु ने 12वीं के बाद दुर्ग स्थित हेमचंद महाविद्यालय से गणित विषय में स्नातक की डिग्री ली। साधारण परिवार की पृष्ठभूमि होने के बावजूद माता-पिता ने बेटी के सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया और हर कदम पर उसका साथ दिया।

स्नातक के बाद चारु ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की और कम समय में ही अपनी मेहनत का परिणाम दिखा दिया। उन्होंने SSC CGL, SSC CHSL, SSC MTS, SSC GD, SSC CPO, IBPS PO, SBI PO, दिल्ली पुलिस, छत्तीसगढ़ सब-इंस्पेक्टर, ट्रांसपोर्ट सब-इंस्पेक्टर, CG NHM सहित कुल 19 परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। एक ही उम्र में इतने सारे एग्जाम पास करना न केवल कठिन परिश्रम का प्रमाण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि लक्ष्य कितना भी बड़ा क्यों न हो, दृढ़ संकल्प और सही दिशा से उसे हासिल किया जा सकता है।

मई 2025 से चारु भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG के चेन्नई कार्यालय में असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई और तैयारी का क्रम जारी रखा। लगातार मिली सफलताओं के बावजूद उन्होंने अपने अनुशासन और मेहनत में कभी ढील नहीं आने दी। चारु का मानना है कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती बल्कि उसके लिए रोज थोड़ी-थोड़ी मेहनत और निरंतरता जरूरी है।

चारु ने संवाददाता संजय सेन से बातचीत में अपनी तैयारी का मूल मंत्र साझा करते हुए बताया कि उन्होंने हमेशा विषयवार रणनीति बनाकर पढ़ाई की। इसके साथ ही नियमित मॉक टेस्ट देकर अपनी गलतियों का स्व-विश्लेषण करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। उनका कहना है कि कोचिंग पर पूरी तरह निर्भर रहने की बजाय छात्र खुद अपना विश्लेषण करें और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान दें। यही तरीका उन्होंने अपनाया और इसी से उन्हें बार-बार सफलता मिली। चारु अब यही सुझाव क्षेत्र के उन सभी युवाओं को देती हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

चारु की इस कामयाबी की खबर मिलते ही तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के स्कूलों और कॉलेजों में खुशी की लहर दौड़ गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को अब लग रहा है कि अगर एक छोटे शहर की बेटी इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकती है तो वे भी अपने सपने पूरे कर सकते हैं। चारु की कहानी ने यह साबित कर दिया है कि संसाधनों की कमी प्रतिभा और मेहनत के सामने बाधा नहीं बन सकती। आज तिल्दा की यह बेटी पूरे प्रदेश की बेटियों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है।

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