लोमश देवांगन, खरोरा।................
एक तरफ मौत बांटने वाले प्लांट का कड़ा विरोध, दूसरी तरफ मढ़ी में क्षमता तीन गुना करने जनसुनवाई; प्रदूषण और भारी वाहनों ने किया ग्रामीणों का जीना मुहाल
खरोरा,
औद्योगिक विकास के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर बच्चों और ग्रामीणों की जान से कैसे खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका जीता-जागता उदाहरण खरोरा के समीपस्थ क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। बुधवार को मेसर्स गौरी गणेश स्पंज प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट विस्तार को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। प्लांट के गेट पर सैकड़ों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने जमकर बवाल काटा। विरोध इतना उग्र था कि मौके पर तैनात पुलिस प्रशासन के साथ ग्रामीणों की तीखी धक्का-मुक्की भी हुई।
ग्रामीणों का सीधा और गंभीर आरोप है कि इस मौत के कारखाने का संचालन स्कूल से महज 30 मीटर की दूरी पर किया जा रहा है, जो पूरी तरह से अवैध है।
"सड़क पर दौड़ रहे 'यमदूत', बच्चों को स्कूल भेजना हुआ खौफनाक"-
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने बताया कि प्लांट के ठीक बगल में स्थित स्कूल में हजारों मासूम पढ़ते हैं। जिस प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क की क्षमता बमुश्किल 10 से 12 टन है, वहां कंपनी के 50 टन से अधिक वजनी भारी वाहन रोज 'यमदूत' बनकर दौड़ रहे हैं। लगातार हो रहे हादसों के कारण इलाके में दहशत का माहौल है। नौबत यह आ गई है कि खौफजदा माता-पिता अब बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं और खुद छोड़ने-लाने को मजबूर हैं।
"बीमारियों का गढ़ बना गांव, पानी भी छीन रहा प्रबंधन"-
जनपद सदस्यों और युवाओं ने प्रदूषण के मुद्दे पर प्रबंधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने बताया कि:
* जहरीली हवा: प्लांट से 24 घंटे उड़ने वाली डस्ट और जहरीले धुएं के कारण गांव में सांस और त्वचा की गंभीर बीमारियां महामारी की तरह फैल रही हैं।
* सूखते जलस्रोत: प्लांट द्वारा बेतहाशा दोहन से भूजल स्तर रसातल में जा रहा है। अगर यही हाल रहा, तो निस्तारी और पीने के पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा।
* कागजी हरियाली: पर्यावरण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पेड़ काटने में तो प्रबंधन आगे है, लेकिन वृक्षारोपण सिर्फ फाइलों तक सिमट कर रह गया है।
वादाखिलाफी: मंदिर का वादा अधूरा, कबाड़ का साइकिल स्टैंड-
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने कंपनी की पोल खोलते हुए बताया कि प्रबंधन ने सीएसआर (CSR) के तहत शीतला मंदिर बनवाने का झुनझुना थमाया था, जो आज तक अधूरा है। दिखावे के लिए जो साइकिल स्टैंड बनाया गया है, वह भी कंपनी के कबाड़ से खड़ा कर दिया गया है।
विरोध के बीच 'मुनाफे' की तैयारी: मढ़ी में गुपचुप जनसुनवाई-
एक ओर जहां खरोरा व तिल्दा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर त्राहिमाम मचा है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने रायपुर जिले की खरोरा तहसील के ग्राम मढ़ी में इसी कंपनी के बड़े विस्तार प्रोजेक्ट के लिए जनसुनवाई पूरी कर ली।
क्या है कंपनी का नया 'विनाशकारी' प्लान?
प्रशासनिक अमले (एडीएम उमाशंकर बदे और पर्यावरण अधिकारी प्रकाश रावडे) की मौजूदगी में 45.405 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर उत्पादन क्षमता *तीन गुना* करने का खाका तैयार किया गया है:
* स्पंज आयरन: 1,98,000 से बढ़ाकर 3,96,000 टन प्रति वर्ष (TPA)।
* रोलिंग मिल: 3,42,144 TPA की नई क्षमता प्रस्तावित।
* पावर प्लांट: FBC प्लांट 8 मेगावॉट से 28 मेगावॉट और WHRB प्लांट 12 मेगावॉट से 32 मेगावॉट किया जाएगा।
* फ्लाई एश ब्रिक: राखड़ से बनने वाली ईंटों का उत्पादन 34,600 से बढ़ाकर 1,24,600 प्रतिदिन होगा।
यह क्षेत्र पहले से ही हादसों का गढ़ बन चुका है। बेतहाशा उद्योगों की बाढ़ से बढ़ते अपराध और डेमोग्राफिक बदलाव ने स्थानीय लोगों का जीवन नर्क बना दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या मौतों के आंकड़े का इंतजार कर रहा है?