परिवार का समर्थन, विशेष रूप से मामा की प्रेरणा और असफलता से हार न मानने का जज्बा।
बेमेतरा ,
हौसले बुलंद हों तो सीमित संसाधन और सुविधाएं कभी भी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बनते। इस बात को सच साबित कर दिखाया है नवागढ़ क्षेत्र के ग्राम मुरता के रहने वाले 22 वर्षीय मुकेश साहू ने। दो बार असफल होने के बावजूद हार न मानते हुए मुकेश ने अपने तीसरे प्रयास में NEET 2026 की परीक्षा पास कर MBBS में अपना स्थान पक्का कर लिया है।
ऑनलाइन पढ़ाई से पूरा किया डॉक्टर बनने का सपना
साधारण किसान मनोज साहू के बेटे मुकेश ने अपनी कक्षा 1वीं से 12वीं तक की पढ़ाई गांव के ही शासकीय स्कूल से हिंदी माध्यम में पूरी की है। किसी बड़े और महंगे कोचिंग संस्थान में जाए बिना, उन्होंने घर पर रहकर ही ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई की और डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार किया।
"हार नहीं मानी, असफलता को ही बनाया सीढ़ी"
मुकेश के लिए यह सफर आसान नहीं था:
१.वर्ष 2024: पहले प्रयास में वे महज कुछ अंकों से पीछे रह गए।
२.वर्ष 2025: दूसरे प्रयास में मात्र एक सवाल की चूक के कारण सफलता हाथ से निकल गई।
लगातार दो झटकों के बाद भी मुकेश ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा और दोगुनी मेहनत के साथ तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की। राज्य की प्रथम चरण की काउंसलिंग में उनका चयन प्रदेश के प्रतिष्ठित शासकीय चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज, दुर्ग में हुआ है।
मामा के सम्बल और परिवार के विश्वास से मिली ताकत
अपनी इस उपलब्धि का श्रेय मुकेश ने अपने परिवार, गुरुजनों, इष्टदेव और विशेष रूप से अपने मामा को दिया है। मुकेश ने भावुक होकर बताया, "जब मैं दो बार असफल हुआ तो एक पल के लिए लगा कि सब खत्म हो गया, लेकिन मेरे मामा ने मेरा हाथ थामे रखा। उन्होंने हर दिन मुझे हौसला दिया कि तीसरी बार सफलता जरूर मिलेगी।"
पूरे गांव में खुशी का माहौल
मुकेश की इस बड़ी कामयाबी से न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे मुरता गांव में जश्न और गर्व का माहौल है। एक ग्रामीण सरकारी स्कूल से निकलकर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने का मुकेश का यह सफर उन सभी ग्रामीण छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है जो सीमित साधनों में बड़े सपने देखते हैं।